मुखड़ा :
डोंगरगढ़ के हां...
बमलाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां 2
हां बमलाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां 2
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अंतरा 1 :
जब के सौ रहे तोर ईड़ही अउ सिड़ही, के सौ
रहे पुजारी 2
जब के सौ रहे पुजारी, वो मैया के सौ
रहे पुजारी,
के सौ रहे तोर ईड़ही अउ सिड़ही, के सौ
रहे पुजारी।
जब के सौ रहे तोर जोत जलत हे...
जगमग जगमग हां,
जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां 2
हां जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां 2
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अंतरा 2 :
जब नौ सौ एक तोर ईड़ही अउ सिड़ही,
लाखों रहे पुजारी 2
जब लाखों रहे पुजारी, वो मैया लाखों
रहे पुजारी,
नौ सौ एक तोर ईड़ही अउ सिड़ही, लाखों
रहे पुजारी।
जब आठ सौ सात तोर जोत जलत हे...
जगमग जगमग हां,
जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां 2
हां जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां 2
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अंतरा 3 :
जब ऋषि मुनि मन ध्यान लगाये, तोर चरण
में आये 2
जब तोर चरण में आये, वो मैया तोर चरण
में आये,
ऋषि मुनि मन ध्यान लगाये, तोर चरण
में आये।
जब लाल लंगुरवा जोत जलाये...
जगमग जगमग हां,
जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां 2
हां जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां 2
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अंतरा 4 :
जब ब्रह्मा वेद पढ़े तोर द्वारे, शंकर ध्यान
लगाये 2
जब शंकर ध्यान लगाये, वो मैया शंकर ध्यान
लगाये,
ब्रह्मा वेद पढ़े तोर द्वारे, शंकर ध्यान लगाये।
जब कमलापति तोर आरती उतारे...
जगमग जगमग हां,
जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां 2
हां जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां 2
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अंतरा 5 :
जब पांच भगत मिल तोरे जस गावय, जय
जय बोले हो तुम्हारे 2
जब जय जय बोले हो तुम्हारे, वो मैया जय
जय बोले हो तुम्हारे,
पांच भगत मिल तोरे जस गावय, जय जय
बोले हो तुम्हारे।
जब कमलनारायण आरती सजाये...
सौ मुख दियना हो,
जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां 2
जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां 2
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✍ लेखक: unknown
🎤 प्रस्तुतकर्ता: unknown
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