झुले नजरे नजर मे दाई
झुले नजरे नजर मे वो
माटी के दुर्गा हे महमाई
कईसे करव तोर विदाई
लागे करलाई वो
झुले नजरे नजर मे दाई
झुले नजरे नजर मे वो
नव दिन बर माटी के दुर्गा
पुतरी अस समर के वो
दुर्गा चरन पुजा पावत हे
महिसासुर मार के वो
बैरी अमर होगे दाई
बैरी जबर होगे दाई
चरण पद पाई वो
झुले नजरे नजर मे दाई
झुले नजरे नजर मे वो
झलकत हे तोर गहना गुरिया
आंखी आंखी मा झुले वो
बघवा ऊपर माता बिराजे
हाथ धरे त्रिशुले वो
झलके रिगबिग रिगबिग माता
दमके रिगबिग रिगबिग माता
रहिबे तै सहाई वो
झुले नजरे नजर मे दाई
झुले नजरे नजर मे वो
घर अंगना बिरान लागे
तोर जाती बिराती वो
भितरी भितरी मा मन कलपत हे
अंतस फाटे छाती वो
हे दुर्गा अन्नपुर्णा माई
लागे सुन्ना सुन्ना दाई
लागे पहुनाई वो
झुले नजरे नजर मे दाई
झुले नजरे नजर मे वो
बछ्छर भर मा लहुट के आबे
माटी के दुर्गाा दाई वो
चलत चलागन पुरखा पुरागन
तैसने करन विदाई वो
नांदगाव नंदाई हुलिया
लिखे परमानंद कठुलिया
कांति सिर नाई वो
झुले नजरे नजर मे दाई
झुले नजरे नजर मे वो
✍ लेखक: परमानन्द कठोलिया
🎤 प्रस्तुतकर्ता: KOK Creation
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