मुखड़ा
साजे सतवंतिन दाई, रुचमुच श्रृंगारी वो,
तोरे दरश बर आये, देवता नर नारी वो।
तैं हस सतजुगहीन माता 2,
लक्ष्मी दुर्गा काली वो...
साजे सतवंतिन दाई, रुचमुच श्रृंगारी वो,
तोरे दरश बर आये, देवता नर नारी वो।
अंतरा 1
येहो लाली लाली लक्ष्मी दाई, लाली लाल
सुहाये वो,
लाली लाल सुहाये।
येहो क्षीरसागर मा विष्णु संग मा,
शोभा तहीं बढ़ाये वो, शोभा तहीं बढ़ाये।
ये कमला अउ विमला तहीं 2,
सीता जनक दुलारी वो...
(मुखड़ा)
साजे सतवंतिन दाई...
अंतरा 2
येहो दुर्गा दुख ला हरे तहीं, करके बघवा
सवारी वो,
करके बघवा सवारी।
येहो आठो हाथ मा त्रिशूल भाला,
मुदगर धरे कटारी वो, मुदगर धरे कटारी।
ये शक्ति के तैं अवतारी 2,
तैं आदि कुंवारी वो...
(मुखड़ा)
साजे सतवंतिन दाई...
अंतरा 3
येहो कारी बरन तोर काली माता, कारी चुंदी
छरियाये वो,
कारी चुंदी छरियाये।
येहो कारी कारी तोर गहना जेवर,
कारी चूड़ी खनकाये वो, कारी चूड़ी खनकाये।
ये काली तोर कारी कजरा 2
दिखे भयकारी वो...
(मुखड़ा)
साजे सतवंतिन दाई...
अंतरा 4
येहो दुर्गा माता एके हावस, तीन ठन रूप
चिन्हाये वो,
तीन ठन रूप चिन्हाये।
येहो तीन रूप के दर्शन करके,
साधु संत भरमाये वो, साधु संत भरमाये।
ये सोचत घलो प्रेम हा रइथे 2
खड़े तोरे दुवारी वो...
समापन
साजे सतवंतिन दाई, रुचमुच श्रृंगारी वो,
तोरे दरश बर आये, देवता नर नारी वो।
✍ लेखक: Prem ustad
🎤 प्रस्तुतकर्ता: kkPanchare-Jas bhajan CG JAS SEVA
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