⛳ जसगीत लिरिक्स — छत्तीसगढ़ी 🔱
🌺 “चले सगुरी नहाय” 🌺
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मुखड़ा :
चले सगुरी नहाय, माता भुवन ले निकल के
चढ़-ऐ माता भुवन ले निकल के हो ॥2॥
चले सगुरी नहाय, माता भुवन ले निकल के
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अंतरा 1/
ये कोन कोड़ाय ताल सगुरी, कोन बांधे हे पार
कोन करे रखवारी, चले गंगा के पार,
माता भुवन ले निकल के...
राम कोड़ाय ताल सगुरी, लक्षमण बांधे
हे पार
लंगूर करें रखवारी, चले गंगा के पार,
माता भुवन ले निकल के...
चढ़-ऐ माता भुवन ले निकल के हो ॥2॥
चले सगुरी नहाय, माता भुवन ले निकल के
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अंतरा 2/
के वो कोसन ताल सगुरी, के कोसन के पार
के कोसन रखवारे, चले गंगा के पार,
माता भुवन ले निकल के...
आठ कोसन ताल सगुरी, नव कोसन के पार
दास वो कोसन रखवारे, चले गंगा के पार,
माता भुवन ले निकल के...
चढ़-ऐ माता भुवन ले निकल के हो ॥2॥
चले सगुरी नहाय, माता भुवन ले निकल के
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अंतरा 3/
कोन दिशा हे ताल सगुरी, कोन दिशा हे पार
कोन दिशा हे रखवारे, चले गंगा के पार,
माता भुवन ले निकल के...
पुरब दिशा हे ताल सगुरी, पश्चिम हावे पार
उत्तर दिशा ताल सगुरी, चले गंगा के पार,
माता भुवन ले निकल के...
चढ़-ऐ माता भुवन ले निकल के हो ॥2॥
चले सगुरी नहाय, माता भुवन ले निकल के
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✍ लेखक: Dukalu yadav
🎤 प्रस्तुतकर्ता: DUKALU YADAV MUSIC
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