जसगीत
माता सती भवानी ओ
माता सती भवानी ओ, मइके जाये बर रटन
लगाये, जिद ल मताये ओ।
उड़ान:
यहो मया के बधना, मया म दाई -2
मया म तैहा बधाय -2
माता सती भवानी ओ, मइके जाये बर रटन
लगाये, जिद ल मताये ओ।
अंतरा 1
यहो तईहा समय म दक्ष राजा हर, यज्ञ रचाये
भारी।
यहो नेवता पाये देव ऋषि मन, जावत ओरी
पारी।
यहो ओही तीर चदरमा ल जावत देखे, जब
शक्ति महतारी।
यहो पूछे बर भेजे बिमला सखी ल, शिव के
परम पियारी।
यहो तुरते जाके चदरमा ल पूछे, कहा हावय
तैयारी।
यहो दक्ष राजा के बात सुनाये, तब चदरमा
भारी।
उड़ान:
सुने सती हर जाके बताये -2
एकेच ठन ल बताय -2
माता सती भवानी ओ, मइके जाये बर रटन
लगाये, जिद ल मताये ओ।
अंतरा 2
यहो गांव भर सुनता बटत हे महतारी, भोला
के तीर म जाये।
यहो यज्ञ रचे हे मोर मइके म, कहिके सती
गोहराये।
यहो सब देवता मन जावत हावे, मोरो मन ह
होथे।
यहो संग म महुँ ल लेगजा कहिके, सती हां
जिद ल मताथे।
यहो सती के बोली ल सुनके भोला हा, सती
ल अइसे मनाथे।
यहो तोर ददा मोला बइरी बनाये, कहिके बढ़
समझाथे।
उड़ान:
यहो नेवता घलो नई हे भेजाये -2
झन जा कहीके चेताय -2
माता सती भवानी ओ, मइके जाये बर रटन
लगाये, जिद ल मताये ओ।
अंतरा 3
यहो कोनो नई जावय बिन नेवता के, काबर
करथो नदानी।
यहो बिन नेवता के तैहर जाबे, हासी परही
भवानी।
यहो जग म फदित्ता भारी होही, झन कर तै
मनमानी।
यहो बड़ पछताबे पाछू तैहर, मान ले तैहर
सयानी।
यहो भोला के अईसन बोली ल सुनके, अउ
बहियागे भवानी।
यहो अपन ददा बर सती बगियागे, खिसियाये
आनी-बानी।
उड़ान:
यहो सती के अंग-अंग कापन लागे -2
रीस भारी भन्नाय -2
माता सती भवानी ओ, मइके जाये बर रटन
लगाये, जिद ल मताये ओ।
अंतरा 4
यहो शिव के बिना यज्ञ रचाये, बुध कइसे
पतरागे।
यहो कइसे यज्ञ हा पूरा होही, शिव के दिन
अभागे।
यहो चिंता होवत हे भारी मोला, देखत यज्ञ
सर्वांगे।
यहो आज्ञा देदे मोला कहिके, सती ओ
अरझाथे।
यहो सती माता के जिद के आगू, भोला घलो
रजवाथे।
यहो शिव आज्ञा पाये, जोरन करन लागे।
उड़ान:
यहो बइला नदिया म कर के सवारी -2
मइके डहर ओ जाय -2
माता सती भवानी ओ, मइके जाये बर रटन
लगाये, जिद ल मताये ओ।
अंतरा 5
यहो शिव गण घलो संग म जाथे, नाचत कुदत
भारी।
यहो अइसे किसम ले सती महतारी, पहुंचे
दक्ष दुवारी।
यहो देखे सती संग कोनो नई बोले, अउ करत
हे चारी।
यहो बहनी घलो मन हास-हास के, निंदा
करथे भारी।
यहो सब देवता मन अलगे बईठे, देखे सती
महतारी।
यहो शिव के सिंहासन जब नई देखे, सती
दुखियाये भारी।
उड़ान:
यहो नदिया बइला म कर के सवारी -2
मइके डहर ओ जाय -2
माता सती भवानी ओ, मइके जाये बर रटन
लगाये, जिद ल मताये ओ।
अंतरा 6
यहो शिव गण घलो संग म जाथे, नाचत कुदत
भारी।
यहो अइसे किसम ले सती महतारी, पहुंचे
दक्ष दुवारी।
यहो देखे सती संग कोनो नई बोले, अउ करत
हे चारी।
यहो बहनी घलो मन हास-हास के, निंदा
करथे भारी।
यहो सब देवता मन अलगे बईठे, देखे सती
महतारी।
यहो शिव के सिंहासन जब नई देखे, सती
दुखियाये भारी।
उड़ान:
यहो नदिया बइला म कर के सवारी -2
मइके डहर ओ जाय -2
माता सती भवानी ओ, मइके जाये बर रटन
लगाये, जिद ल मताये ओ।
अंतरा 7
यहो थोड़े दया तोला लागिस नईहे, ददा ल
तोर बेटी बर।
यहो शिव के बिना यज्ञ रचाये, अंधरा बरोबर
तैहर।
यहो ब्रम्हा विष्णु घलो नई छोड़य, बोली बान
ले जाहूहर।
यहो सती रुशियागे ओरी-पारी, सब देवता
मन बर।
यहो अईसने बोली सुनके, बगियागे सती बर।
यहो शिव ल बहिहा पगला कहिके, सती ल
सुनाये ओहर।
उड़ान:
यहो शिव के निंदा सुनके सती के -2
जिव बारी करलाय -2
माता सती भवानी ओ, मइके जाये बर रटन
लगाये, जिद ल मताये ओ।
अंतरा 8
यहो मोरो जीना विरथा हावय, पति के निंदा
सुनके।
यहो कइसे जाहु शंकर तीर म, करिया मुहु ल
लेके।
यहो कल तोला भोगे ल परही, मोर फुटहा
करम के।
यहो अइसे सती हर मने मन बोले, शिव के
सुरता ल करके।
यहो हावन कुंड म तन ल त्यागे, सती हर
जाहुहर गिरके।
यहो शारदा परिवार किस्सा सुनाये, अमर
सती मरण के।
उड़ान:
कुंजलाल अऊ गौतम के दाई -2
आंसू धार बोहाय -2
माता सती भवानी ओ, मइके जाये बर रटन
लगाये, जिद ल मताये ओ।
✍ लेखक: Kunjlal Sahu
🎤 प्रस्तुतकर्ता: kumar Jitendra
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