ममता के आँसू बरसाये दाई ओ
सब मानव मन के तै प्यास बुझाये
सब मानव मन के तै प्यास बुझाये
शीतला सताक्षी शाकम्भरी तै
शीतला सताक्षी शाकम्भरी तै
सब के भूख मिटाये
सब मानव मन के प्यास बुझाये
एक समय जब अईसन आये
धरती बंजर सुखा रहाये
लकलक लकलक सुरूज नारायण
आगी अंगरा कस ताप बढ़ाये
पटपट पटपट जीव जंतु सब
पटपट पटपट जीव जंतु सब
मनखे मरत हे जाये
तब मानव मन के प्यास बुझाये
बिन पानी के बिरथा हे जीवन
खाये बन नई हे कोठी मा अन्न
भूखे प्यासे कलपत सब झन
शीतला दाई ला गोहराये उही कन
अईसन कईसन दिन हा आगे
अईसन कईसन दिन हा आगे
तन के लहू हा सुखाये
सब मानव मन के प्यास बुझाये
देख दशा ला माता शीतला के
आँखी ले आँसू टपटप टपके
बंजर भुईया होगे हरियर
तरिया नंदिया पानी मा छलके
महतारी के मया पलपलाये
महतारी के मया पलपलाये
सब के परान बचाये
सब मानव मन के प्यास बुझाये
देवता दानव जग के मानव
जग जननी के मान बढ़ाये
असाड़ महिना शीतला दाई ला
शीतल करे जुड़वास मनाये
लीम के डारा तेल तिली हरदी
लीम के डारा तेल तिली हरदी
प्रेम कोसरिया चघाये
सब मानव मन के प्यास बुझाये
शीतला सताक्षी शाकम्भरी तै
शीतला सताक्षी शाकम्भरी तै
सब के भूख मिटाये
सब मानव मन के प्यास बुझाये
ममता के आँसू बरसाये दाई ओ
सब मानव मन के तै प्यास बुझाये
सब मानव मन के तै प्यास बुझाये
✍ लेखक: ओपी देवांगन
🎤 प्रस्तुतकर्ता: 360INDIA
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