मुखड़ा :
जै जै दुर्गा हो....
नवदुर्गा हो माता, जय जय दुर्गा हो ॥2॥
अंतरा 1 :
जब देवगण करीन पुकारे हो माता, नवदुर्गा
अवतारी,
करके सिंह सवारी हो माता, अष्टभुजा
अठधारी,
महिमा हावय तोर न्यारी हो माता, रूप
भयंकर भारी,
पूजा करे तोर जग नर नारी, जय जय दुर्गा
हो...
नवदुर्गा हो माता, जय जय दुर्गा हो ॥2॥
अंतरा 2 :
जब जम्भासुर राक्षस जब आये, दुर्गा मां
पहुंचाये,
होत लड़ाई बहुत भयंकर, छिन-छिन रूप
बनाएं,
शीतला चंडी तुही महामाया, अब कंकाली
कहाए,
जगदंबे अंबे महरानी, बमलाई समलाई आये,
ऐसे में नवदुर्गा कहाए, जय जय दुर्गा हो...
नवदुर्गा हो माता, जय जय दुर्गा हो ॥2॥
अंतरा 3 :
जब जम्भासुर को मार गिराए, जनम लिए
महिषासुर,
भाला खाड़ा हाथ बिराजे, रूप दिखे
विकराली,
त्रिशूल मार गिराए हो अंबे, रक्त के धार
बहाये,
बालक बरुवा कछु नई जाने, जय जय दुर्गा
हो...
नवदुर्गा हो माता, जय जय दुर्गा हो ॥2॥
समापन :
जय जय दुर्गा हो...
नवदुर्गा हो माता, जय जय दुर्गा हो ॥2॥
✍ लेखक: unknown
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Jasgeet Sangrah
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