अरे महंगाई के मार रे संगी
झेलत हे संसार
अरे रंग गुलाल कहां ले लावौ
अउ कामा मनाबो तिहार
महंगाई म कहां के रंग गुलाल रे
गरीबी म आटा गिला ना
ये गरीबी म आटा गिला ना रे
गरीबी म आटा गिला ना
ये खाली बटवा म नई हे माल वाल रे
गरीबी म आटा गिला ना
महंगाई म कहां के रंग गुलाल रे
गरीबी म आटा गिला ना
साठ रूपिया किलो टमाटर कामा खाबो चटनी
आलू प्याज के भाव ल सुन के रोवै सब के पतनी
नोहर होगे, नोहर होगे
नोहर होगे खाए बर राहेर दाल रे
गरीबी म आटा गिला ना
महंगाई म कहां के रंग गुलाल रे
गरीबी म आटा गिला ना
भ्रष्ठाचारी बेरोजगारी हमर देश के हाल हे
कुर्सी म बईठे नेता अधिकारी उही मन मालामाल हे
ए ठेला रिक्सा, ठेला रिक्सा
ठेला रिक्सा वाला हे कंगाल रे
गरीबी म आटा गिला ना
महंगाई म कहां के रंग गुलाल रे
गरीबी म आटा गिला ना
महंगाई के आगी ले बढ़ के पेट के आगी होथे
बड़ हर खाथे दाल घी संग निर्धन भूखे सोथे
ए कोसरिया के, कोसरिया के
ए कोसरिया के इही हे सवाल रे
गरीबी म आटा गिला ना
महंगाई म कहां के रंग गुलाल रे
गरीबी म आटा गिला ना
ये गरीबी म आटा गिला ना रे
गरीबी म आटा गिला ना
खाली बटवा म
खाली बटवा म नई हे माल वाल रे
गरीबी म आटा गिला ना
✍ लेखक: -
🎤 प्रस्तुतकर्ता: KK CASSETTE
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