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🌼 जसगीत – "झूले झूलना दाई" 🌼
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🎶 मुखड़ा :
तोर ललना झुलावय, आज वो दाई, झूले
झूलना ॥2॥
ये झूले झूलना वो दाई, झूले झूलना वो,
तोर ललना झुलावय, आज वो दाई, झूले
झूलना ॥2॥
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🎶 अंतरा 1 :
यहो श्रद्धा के सुघर पलना बने हे, डोरी हे
विश्वास के,
माया–पिरित के हावय वो बंधना, डाली
भक्ति–आस के।
ये आ जाबे ना वो दाई, आ जाबे ना वो… ॥
2॥
🔁 (मुखड़ा दोहराव)
तोर ललना झुलावय, आज वो दाई, झूले
झूलना ॥2॥
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🎶 अंतरा 2 :
यहो झूला बंधे हे मन-मंदिर मा, हृदय के हावे
बिछौना,
तेंहर झूलबे शाखा तीर मा, सुमरे मन मतौना।
ये साध साधो ना वो दाई, साध साधो ना
वो… ॥2॥
🔁 (मुखड़ा दोहराव)
तोर ललना झुलावय, आज वो दाई, झूले
झूलना ॥2॥
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🎶 अंतरा 3 :
यहो पलना बिराजो सातो बहनिया, झूला
झूले मन भर,
अपन भगत के लाज ला राखो, शरण मा
हावे भुवनेश्वर।
ये तन झूलना वो दाई, तन झूलना वो…
ये मन झूलना वो दाई, मन झूलना वो…
🔁 (मुखड़ा दोहराव)
तोर ललना झुलावय, आज वो दाई, झूले
झूलना ॥2॥
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✍ लेखक: भुवनेश्वर प्रसाद साहू
🎤 प्रस्तुतकर्ता: BPS साधना
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