🎶 जसगीत / लिरिक्स / छत्तीसगढ़ी 🎶
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मुखड़ा (स्थायी)
जब तरिहच नारी नाहना वो माय,
नाहा नारी नाहना ये वो ॥2॥
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अंतरा 1
जब इन्द्र लोकन में वो हावय, इन्द्राचल भल
राजा ये वो ॥2॥
जब जीना करा रनिया वो हावय, माता मोर
इन्द्रोतिन वो ॥2॥
जब जीना करा बेटिया वो हावय, कारी
माता कनाही वो ॥2॥
जब तरिहच नारी नाहना वो माय,
नाहा नारी नाहना ये वो ॥2॥
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अंतरा 2
जब बारह बच्छर के होगेव, तेरवा के लागे
छांवे ये वो ॥2॥
जब घरहीन मा कुलिया वो दाई, घरहीन मा
बउली ये वो ॥2॥
जब घरहीन मा करेव दाई, करेंव मैं असनाने
ये वो ॥2॥
जब तरिहच नारी नाहना वो माय,
नाहा नारी नाहना ये वो ॥2॥
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अंतरा 3
जब घरहीन मा नहावत दाई, अंग में मैल
बैठय ये वो ॥2॥
जब आसे गंगा नहाये के, लागय मोला सादे
वो ॥2॥
जब मान सरोवर नाहय के, साधे मत
करिहव वो ॥2॥
जब तरिहच नारी नाहना वो माय,
नाहा नारी नाहना ये वो ॥2॥
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अंतरा 4
जब मान सरोवर में दाई, भुतवा के वास
हावय वो ॥2॥
जब अरजे नैई मानय माता, बरजे नैई मानय
वो ॥2॥
जब गंगा वो नाहय बर दाई, जाने वो
लगावय वो ॥2॥
जब तरिहच नारी नाहना वो माय,
नाहा नारी नाहना ये वो ॥2॥
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अंतरा 5
जब सुरहिन गैया के दाई, गोबर घलो
मंगावय वो ॥2॥
जब खुंट धरी अंगना वो दाई, सुघर घलो
लिपावय वो ॥2॥
जब मोतियन चौंक पुराये, गैईला घलो
मड़ावय वो ॥2॥
जब तरिहच नारी नाहना वो माय,
नाहा नारी नाहना ये वो ॥2॥
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अंतरा 6
जब सोने करा गैईला ला माता, अंगना मा
घलो मड़ावय वो ॥2॥
जब सातो सखी आघु वो दाई, सातो सखी
पांछु मा वो ॥2॥
जब माझे महुलान रेगय, कारी माता कनाही
ये वो ॥2॥
जब तरिहच नारी नाहना वो माय,
नाहा नारी नाहना ये वो ॥2॥
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✍ लेखक: unknown
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Bhaktigeet Sangrah
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