टेक (मुखड़ा):
सरस्वती मैया हो…
सुरताल देवैया वो सरस्वती मैया हो ॥2॥
हां सुरताल देवैया वो सरस्वती मैया हो ॥2॥
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अंतरा 1.
येहो अखिल लोक की तूं परमेश्वरी,
आदिशक्ति कहायी ॥2॥
येहो काली लक्ष्मी महासरस्वती,
कतको नाम धरायी ॥2॥
येहो षष्ट गुणों में प्रगट हुई मां,
जग में ज्योति जलाई ॥2॥
येहो विद्या बुद्धि वाणी देवैया,
कीर्ति सब जग छाई ॥2॥
टेक:
येहो तीन लोक महिमा सुर गायी,
सरस्वती मैया हो…
सुरताल देवैया वो सरस्वती मैया हो ॥2॥
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अंतरा 2.
येहो सरस्वती ब्रह्मा की बेटी तैं,
जग में करे उजियारे ॥2॥
येहो चंद्र बदन मुख गौर वरण हे,
हरे दुख तैं भारी ॥2॥
येहो वीणा पुस्तक अक्षत माला,
अंकुश कर में धारी ॥2॥
येहो सकल चराचर तोरेच गुण ला,
गावत हे महतारी ॥2॥
टेक:
येहो माता हंसा हे तोरे सवारी,
सरस्वती मैया हो…
सुरताल देवैया वो सरस्वती मैया हो ॥2॥
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अंतरा 3.
येहो जनसंपर्क के भय ले तेंहा,
पाताल पुरी में जाये ॥2॥
येहो ब्रह्माणी के आज्ञा मानके,
नदी रूप धर आये ॥2॥
येहो पुष्कर क्षेत्र में प्रगट होके,
सरस्वती नदी कहाये ॥2॥
येहो पापीजन के पाप हरे सब,
ग्रंथ पुराण बताये ॥2॥
टेक:
येहो जब नाम लेत सब पाप नशाये,
सरस्वती मैया हो…
सुरताल देवैया वो सरस्वती मैया हो ॥2॥
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अंतरा 4.
येहो तिंही सबो के जिभिया में बैठे,
निर्मल करथस वाणी ॥2॥
येहो राग रागिनी सातों स्वर के,
अजब हस वरदानी ॥2॥
येहो तोर चरण में हमू पड़े हन,
कृपा करो महरानी ॥2॥
येहो विजय कहां तक वर्णन करही,
तोर हे अगम कहानी ॥2॥
अंतिम टेक:
येहो क्षमा करो मां वीणावादिनी,
सरस्वती मैया हो…
सुरताल देवैया वो सरस्वती मैया हो ॥2॥
हां सुरताल देवैया वो सरस्वती मैया हो,
सुरताल देवैया वो सरस्वती मैया हो॥
✍ लेखक: विजय
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Pekhanlal Sahu Dhamtari CG Jasgeet
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