मुखड़ा
रण गरजे वो काली,रण में रंगझाझर मचाये 2
यहो पानी बुड़े, कोनो ला नई बचाये....
रण गरजे वो काली,रण में रंगझाझर मचाये 2
अंतरा 1/
यहो बरदी के बरदी भूतवा ला देखत, काली
झपट के कूदे 2
काली झपट के कूदे....
अंतरा 2/
यहो कोरी कोरी भुतवा ला धरी धरी
खाये,तन के नई हे सुधे 2
तन के नई हे सुधे...
ऐहो कतको खाये, तभो ले नई अघाये....
रण गरजे वो काली रण में रंगझाझर मचाये 2
अंतरा 3/
यहो कतको ला खाये कतको ला खुंदे,लादी
पोटा छरियाये 2
लादी पोटा छरियाये....
अंतरा 4/
यहो मांस के गैरी हा माते, जोगिनी चित चित
खाये 2
जोगिनी चित चित खाये....
यहो कलर कलर, काली हा कलकलाये....
रण गरजे वो काली,रण में रंगझाझर मचाये 2
अंतरा 5/
यहो किटकिट किटकिट दांत ला पिसे,
रनबन रनबन झुपे 2
रनबन रनबन झुपे...
अंतरा 6/
यहो काली के रूप ला देखके देवता,बैठे काले
चुपे 2
बैठे काले चुपे...
यहो देवता के ,बनौखी ला बनायें.....
रण गरजे वो काली,रण में रंगझाझर मचाये 2
अंतरा 7/
यहो बांचे खोंचे जी धरके भागे,खोजें नैई
मिले एको जन 2
खोजें नैई मिले एको....
अंतरा 8/
यहो प्रलय रुप ला देखत देवता,शिव ला कहे
जा छेंको 2
शिव ला कहे जा छेंको....
यहो कोई हा नई बाचन गोहरायें......
रण गरजे काली ,रण में रंगझाझर मचाये 2
अंतरा 9/
यहो बीच रावन में शिवजी हा सुतगे, काली
आके झपाये 2
काली आके झपाये....
अंतरा 10/
यहो खडग खप्पर त्रिशूल धरे,लफ लफ
जीभीया लमाये 2
लफ लफ जीभिया लमाये...
यहो परमानंद कठोलिया हा दरश पाये....
रण गरजे वो काली,रण में रंगझाझर मचाये 2
✍ लेखक: परमानंद कठोलिया
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Pekhanlal Sahu Dhamtari CG Jasgeet
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