मुखड़ा:
माटी के पुतरी अंबा, नवदिन बर आये हो,
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर ॥2॥
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अंतरा 1:
यहो नवदुर्गा नवरूप नारायणी आये जग
महतारी वो,
धन हे कुम्हरा भाग रे भारी, माटी ला तैं लाये
वो।
उही माटी ला मताके कुम्हरा, दुर्गा तन
सिरजाये वो,
धन-धन हे तोरे भाग रे भाई, दुर्गा ला बनाये
वो॥
➡️ माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर ॥2॥
माटी के पुतरी अंबा...
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अंतरा 2:
दुर्गा तन ला सिरजन करके, शृंगारी ला
सजाये वो,
लाली लुगरा लाली पोलखा, झर-झर बिंदिया
लगाये वो।
मोहनी मुरतिया पुतरी बरोबर, दाई हा
झलकत हे वो,
श्री दुर्गा के सिरजन होगे, दाई हा जग में
आये हो॥
➡️ माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर ॥2॥
माटी के पुतरी अंबा...
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अंतरा 3:
कुम्हरा घर ले जम्मो सेवुक, दाई ला हे लाये
वो,
पान-फूल के भोग लगाके, दाई ला बैठारे
वो।
अगर-कपुर कंचन थाली मा, तोर बर हार
सजाये वो,
सुमर-सुमर के झुमर-झुमर के, आरती तोर
गाये हो॥
➡️ माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर ॥2॥
माटी के पुतरी अंबा...
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अंतरा 4:
चैत कुंवारे तोर महामाई, सरग कस हे लागे
वो,
पंचमी तैं काली बनके, संऊहे दरश देखाये
वो।
आठे के तोर हूमन कराके, गुण-गुण सेवा
गाये वो,
सोई सुरता तोर सताही, बिदा के बेरा आये
वो॥
➡️ माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर ॥2॥
माटी के पुतरी अंबा...
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अंतरा 5:
बेटी बरोबर दाई के बिदा, आंखी ले आंसू
बोहाये वो,
सगुरी नहाये चले महामाई, सगुरी मा समाये
वो।
होगे विसर्जन तोरे वो दाई, सुना-सुना जग
लागे वो,
गुणत-गुणत कर डारेव बिदा, अपने लोक
जाये वो॥
➡️ माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर ॥2॥
माटी के पुतरी अंबा नवदिन बर आये हो,
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर ।।2।।
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✍ लेखक: Vinod dewangan
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Vinod dewangan official
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