मां येहो निरंजन जोगी नंद घर अलख जगाये हो मां -संपतलाल निषाद

मां येहो निरंजन जोगी नंद घर अलख जगाये हो मां -संपतलाल निषाद

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मां येहो निरंजन जोगी, नंद घर अलख

जगाये हो मां...

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मुखड़ा:

हो निरंजन जोगी, हो निरंजन जोगी,

नंद घर अलख जगाये हो मां।।2।।

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अंतरा 1 :

हा अंग भभूत, बगल मृग छाला, शेष नाग

लपटाये हो मां।।2।।

माथे उनके तिलक चंद्रमा, जोगी जटा

बड़ाये...

हो निरंजन जोगी, हो निरंजन जोगी,

नंद घर अलख जगाये हो मां।।2।।

.......

अंतरा 2 :

हां ले भिक्षा निकले नंदरानी, मोतियन थाल

भराये हो मां।।2।।

भिक्षा लेकर जावो बाबा, मोर गोपाल डराये...

हो निरंजन जोगी, हो निरंजन जोगी,

नंद घर अलख जगाये हो मां।।2।।

.........

अंतरा 3 :

हां ना चाहिए तोर धन और दौलत, न चाहिए

तोर माया हो मां।।2।।

तोर गोपाल के दरशन कारण, मैं कैलाश से

आया...

हो निरंजन जोगी, हो निरंजन जोगी,

नंद घर अलख जगाये हो मां।।2।।

.....

✍ लेखक: unknown

🎤 प्रस्तुतकर्ता: Amaraiya Studio


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