आमा पान के पतरी बनायेव केरा पान के दोना सजायेव
गजमोतियन के चउक पुरायेव चन्दन चौकी बैठक मडायेव
जग-मग जग-मग दिया ला बारेव झुपत झुपत आबे ओ
दाई मोर घर अंगना झुपत झुपत आबे ओ 2
झुपत रहिबे ओ दाई झुपत रहिबे ओ
संग मा दुलरवा ला खेलावत रहिबे ओ ||2||
काली बनके झुपथस की दुर्गा बनके झुपय ओ
छोटे मोटे बरुआ ला समारत रहिबे ओ
झुपत रहिबे ओ दाई झुपत रहिबे ओ
संग मा दुलरवा ला खेलावत रहिबे ओ ||2||
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते
नई जानव मै कोनो सेवा कईसे तोला मनावाव वो
जय काली जय खप्पर वाली सुमिरत हावव वो
महाकाल महाकाली रुपे कालरात्रि मै जानव वो
पान सुपारी लानेव माता खप्पर बाना साजेव वो
सरन मा आयेव वो दाई सरन मा आयेव वो
विपदा ला हमरो तै टार देना वो
झुपत रहिबे ओ दाई झुपत रहिबे ओ
संग मा दुलरवा ला खेलावत रहिबे ओ ||2||
ॐ सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥
शैलपुत्री मा ब्रम्हचारिणी कुस्मांडा स्कंदमाता ओ
चंद्रघंटा मा कात्यायनी महागौरी नवदुर्गा ओ
दुर्गा दुरगति नासिनी देवी नवरुपे विराजे ओ
महिषा मर्दिनी नाव धराये तोरे डंका बाजे ओ
शीश नवावव ओ दाई शीश नवावव ओ
छोटे छोटे बरुआ मा आशीष देदे ओ
झुपत रहिबे ओ दाई झुपत रहिबे ओ
संग मा दुलरवा ला खेलावत रहिबे ओ ||2||
काली बनके झुपथस की दुर्गा बनके झुपय ओ
छोटे मोटे बरुआ ला समारत रहिबे ओ
झुपत रहिबे ओ दाई झुपत रहिबे ओ
संग मा दुलरवा ला खेलावत रहिबे ओ ||4||
✍ लेखक: -
🎤 प्रस्तुतकर्ता: SUNDRANI
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