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मुखड़ा:
झूपत आबे वो दाई, नाचत आबे वो,
झूपत आबे वो दाई, नाचत आबे वो।
सातो बहिनिया जुरियाये हो माया मोर 2
झूपत आबे वो दाई, नाचत आबे वो॥ 2
अंतरा 1:
डोंगरगढ़ ले आये माता बमलाई वो 2
मैहर वाली देवी संग शारदा माई वो 2
देवी महामाया संघराये हो माया मोर 2
झूपत आबे वो दाई, नाचत आबे वो॥ 2
अंतरा 2:
संबलपुर ले आये माता समलाई वो 2
दंतेवाड़ा ले आये मैया दंतेश्वरी माई वो 2
देवी काली माई संघराये हो माया मोर 2
झूपत आबे वो दाई, नाचत आबे वो॥ 2
अंतरा 3:
बघवा सवारी बैठे दुर्गा भवानी वो 2
सोला सिंगार साजे दाई आनी बानी वो 2
रोहित मौनी राकेश जस गाये हो माया मोर 2
झूपत आबे वो दाई, नाचत आबे वो॥ 2
समापन:
सातो बहिनिया जुरियाये हो माया मोर 2
झूपत आबे वो दाई, नाचत आबे वो॥ 2
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✍ लेखक: राकेश साहू
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Amar Studio Raipur
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