जंतर मंतर हो – जसगीत लिरिक्स
मुखड़ा
जंतर मंतर हो...
चल घुघुनारा जंतर मंतर हो 2
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अंतरा 1
जब जंतर मंतर घुघुनारा ऐ पारा ले वो पारा 2
जब कारी पिंवरी चाउंर भारा मुड़ ले गोड़
उतारा 2
हो कौरू नगर बर हो...
तुम चलेव दुलरवा कौरू नगर बर हो 2
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अंतरा 2
जब कौरू नगर के पुरुष बखानेव नागर
फांदेव बैला 2
जब घर घर पिंजरा सुवना पोसे रतिहा छैल
छबीला 2
हो सुखा हे रुखा हो...
तोर फुल फुलवरिया सुखा हे रुखा हो 2
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अंतरा 3
जब फुलहीन धोबनीन काहत लागे बाजे
सुखड़ी चमारिन 2
जब कपड़ा कचाले सरग सुखाले सुखड़ी के
गुरुवाईन 2
हो अलीयन गलीयन हो...
गिंगयावय घुघवा अलीयन गलीयन हो 2
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अंतरा 4
जब एक अचंभा देखे दुलरवा पहुंचे नदिया
के तीरा 2
जब माटी के बैला पानी पिये नैन बने तोर
हीरा 2
हो पानी में पथरा के हो...
गिंगयावय कुकरा पानी में पथरा के हो 2
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अंतरा 5
जय महाकाली जय कंकाली काली खप्पर
वाली 2
जब तोर शरण में दुलरु आये भक्तन के
रखवाली 2
हो नाचे हे परमानंद हो...
तिरशुल में देवता नाचे हे परमानंद हो 2
✍ लेखक: परमानंद कठोलिया
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Bhaktigeet Sangrah
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