झुरहूर झुरहूर (जसगीत)
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मुखड़ा:
जब झुरहूर झुरहूर हां..
जब नार बहत हे झुरहूर झुरहूर हां। 2
येहो जब नार बहत हे झुरहूर झुरहूर हां 2
अंतरा 1:
जब झुरहूर झुरहूर नार बहत हे, बैठे अंजनी
नहाये।
ज्यों ज्यों अंजनी अंग नहाये, त्यों त्यों पीरा
जनाये।
चार गोड़ इक मुढ़ दिखत हे, लम्बा तीर
जनाये।
जब अंजनी के कोख में, मोर भये हनुमंता।
अंजनी के कोख में हां, मोर भये हनुमंता,
अंजनी के कोख में हां।
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अंतरा 2:
जब जग भारेव, जग भारेव रे मैं, भारेव कुल
परिवारा।
चंदा सूरज दोनों ला भारेव, जगत परे
अंधियारा।
सुनिहौ राम सुनिहौ लक्ष्मण, सुनिहौ भैया
हमारो।
जब तेतीस कोटि बेंदरवा के ऊपर टोड़ा ला
पहिरके हां,
जब नार बर आइस टोड़ा ला पहिरके हां।
अंतरा 3:
जब टोड़ा ला पहिरे नार बर आइस, संतन के
रखवाला।
दक्षिण चीर मरघट्टी खोपा, ऊपर पहाड़ के
झोपा।
दाहिन घाघर अतिबल सोहे, सुंदर चले
अकेला।
जब राम देखेव लक्ष्मण देखेव, सेना तुम्हार
वानर हां।
मैं देख लेतेव सेना तुम्हार वानर हां।
अंतरा 4:
जब वानर वानर मतका बरही, मत ले मुंह के
गैला।
अड़ाई दिन के मैं हनुमंता, टोरेव तोर गढ़
लंका।
लंका टोर पर लंका फोरेव, ऊपर सिंघ
बहोरेव।
जब सर्व सोन के वह गढ़ लंका, टोरी फोरी
टोरी फोरी हां।
समुद में डुबाये टोरी फोरी टोरी फोरी हां।
अंतरा 5:
जब वानर वानर मत का बरही, मैं हनुमंता
बीरा।
मैं हनुमंता बीर भयंकर, लट फूटे मुंड़ फूटे।
मेघनाथ के भुजा उखाड़ेव, कुंभकरण रण
मारेव।
जब पकड़ मंदोदरी मैं धरी डारेव, का मोरी
करी हैं हां।
दस मुंड़ के हो रावण का मोरी करी है हां।
यहो दस मुड़ के हो रावण का मोरी करी हौं हां।
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✍ लेखक: मास्टर सुनील सीहोरे
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Master Sunil Sihore -Topic
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