पारंपरिक जंवारा जसगीत-
जब झुरहुर झुरहुर नार बोहत है,
अंजनी ओ बैठ नहावै। (2)
हां जेव जेव अंजनी ओ नीर नहाये,
तेंव तेंव पीरा जनावै। (2)
जब तेंव तेंव पीरा जनावै रे भाई,
तेंव तेंव पीरा जनावै।
जेंव जेंव अंजनी ओ नीर नहाये,
तेंव तेंव पीरा जनावै।
जब चार गोड़ एक मुड़ दिखत है,
लंबा पुंछ जनावै। (2)
जब लंबा पुंछ…
जब सब बपरिन के मानुष पिलवा,
मोर अंजनी के ओ…
ढुलबेंदरा ओ माय,
मोरो अंजनी के हां। (2)
येहो ढुलबेंदरा ओ माय,
मोरो अंजनी के हां। (2)
जब का तोला बेंदरा चुमौं चांटो,
का तोला करौं दुलारा। (2)
जब का तोला करौं…
येहो बेंदरा बेंदरा मत का माता,
मतले मुंह के गैला। (2)
जब मतले मुंह के गैला…
जब अढ़ाई घड़ी के मैं हनुमंता,
लंका ला तोड़ी तोड़ी हो…
मैं समुद बुझायेव,
लंका ला तोड़ी तोड़ी हां। (2)
येहो मैं समुद बुझायेव,
लंका ला तोड़ी तोड़ी हां। (2)
जब लंका ला तोड़ेव, गढ़ लंका तोड़ेव,
ऊपर सींग बहोरे। (2)
जब ऊपर सींग बहोरे…
जब सीया मिलन बर गये हनुमंता,
रुप ला झिपाये कर हां…
अंजनी कर नंदन,
रुप ला झिपाये कर हां। (2)
येहो अंजनी कर नंदन,
रुप ला झिपाये कर हां। (2)
जब मेघनाथ के भुजा ऊखाड़ेव,
कुंभकरण बली धायेव। (2)
जब कुंभकरण बली…
जब पकड़ मंदोदरी मोला लेंहौं,
किया मोला करिहौं हां…
लंकापति रावण,
किया मोला करिहौं हां। (2)
येहो लंकापति रावण,
किया मोला करिहौं हां। (2)
जब सुनिहौं राम,
सुनिहौं लक्ष्मण,
सुनिहौं भैया हमारा। (2)
जब सुनिहौं भैया…
जब अंजनी के सिर पर धानुष भारेव,
भारेव लखनकुमारा। (2)
जब भारेव लखनकुमारा…
जब चांद सुरुज दोनों ला भारेव,
जगत परे है हां…
अंधियारे हो माय,
जगत परे है हां। (2)
येहो अंधियारे हो माय,
जगत परे है हां।
अंधियारे हो माय,
जगत परे है हां।
✍ लेखक: unknown
🎤 प्रस्तुतकर्ता: unknown
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