मुखड़ा
हो मैया चंडीका हो दुर्गा अंबिका आरती
उतारव दाई तीनों जुवार
हो मैया चंडीका हो दुर्गा अंबिका
आरती उतारव दाई तीनों जुवार
....
अंतरा 1
पबरित गंगा के पानी ले- येहो मोर मैया तोरे
चरण पखारव वो,
मखमलीया वस धर ले दाई- येहो मोर मैया
पंउरी के पानी सुखावंव वो
चंदन लाली तिलक सार के -2
फूलवा के माला पहिरावंव...
हो मैया चंडिका हो दुर्गा अंबिका आरती
उतारव दाई तीनों जुवार
....
अंतरा 2
हूम धूप सुगंध उड़ावंव-येहो मोर मैया केसर
अगर जलावंव वो,
थारी भर भर किसम किसम के- येहो मोर
मैया मेवा मिश्री चड़ावंव वो
धौरी गैया के दूध तीर ले-2
ओकर भोग लगावंव ...
हो मैया चंडिका हो दुर्गा अंबिका आरती
उतारव दाई तीनों जुवार
....
अंतरा 3
नव कलशा नव बाती भरके- येहो मोर मैया
आरती जोत जलावंव वो
मने मने मंतर ला पड़के- येहो मोर मैया हृदय
नैनन बसावंव वो
नवदिन राती सेवा करंव मा-2
भवसागर नहकादे ...
हो मैया चंडिका हो दुर्गा अंबिका आरती
उतारव दाई तीनों दुवार
हो मैया चंडिका हो दुर्गा अंबिका
आरती उतारव दाई तीनों जुवार
आरती उतारव दाई तीनों जुवार
आरती उतारव दाई तीनों जुवार
✍ लेखक: unknown
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Amaraiya Studio
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