🪔 हे जगदम्बे माँ अम्बे — जसगीत 🪔
मुखड़ा
हे जगदम्बे माँ अंबे, शरण मा तोरे माता आये हव।
हे जगदम्बे माँ अंबे, हे जगदम्बे माँ अंबे।
अपन बनाले हे माँ अंबे, हिरदे बसाले माँ अंबे।
शरण तोरे माता आये हव — 2
अंतरा — 1
खनखन चूड़ी, छमछम पैरी, झमझम रेंगना सुहाये वो।
लाली के लुगरा, सुघ्घर अचरा, मोहनी रूप बनाये वो — 2
पाँव म बिछिया माँ अम्बे, कनिहा म करधन माँ दुर्गे — 2
सोलह सिंगार म लाये हव।
अपन बनाले हे माँ अंबे, हिरदे बसाले माँ अंबे।
शरण तोरे माता आये हव — 2
अंतरा — 2
हे माँ बम्लाई, आंखी म कजरा, गजरा सुहाये वो।
रुचमुच हासे, जगत प्रकासे, मन ल सबके भाये वो — 2
मांग म लाली, आँखी म कजरा, गजरा गजब सुहाये वो — 2
कहाँ मैं खोजव माँ अम्बे, तोर ठिकाना माँ दुर्गे — 2
हिरदय म तोला बसायेव हव।
अपन बनाले हे माँ अंबे, हिरदे बसाले माँ अंबे।
शरण तोरे माता आये हव — 2
अंतरा — 3
ये तोर अंगना म होके मगन ला, ये युवराज हा गाये वो।
तोर अंगना म सेवा भजन ला, ये युवराज हाँ गाये वो — 2
तोर मया ले माँ अम्बे, तोर दया ले माँ दुर्गे।
तोरे जस पचरा म गाये हव।
अपन बनाले हे माँ अंबे, हिरदे बसाले माँ अंबे।
शरण तोरे माता आये हव — 2
✍ लेखक: पंडित युवराज पांडे
🎤 प्रस्तुतकर्ता: बोल कालिया
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