मुखड़ा :
जब अशोक बन में हो...
मोर सिया घबराए अशोक बन में हां ॥2॥
अंतरा 1 :
जब पहली लेवन बर अंगद जावय, लंका में
पांव जमावय ॥2॥
जब अहिरावण के गरब उखाड़े, अशोक
बन में हो—
मोर सिया घबराए अशोक बन में हां ॥2॥
अंतरा 2 :
जब दूसर लेवन बर हनुमत जावय, लंका में
आग लगावय ॥2॥
जब अक्षय कुमार ला मार गिराये, अशोक
बन में हो—
मोर सिया घबराए अशोक बन में हां ॥2॥
अंतरा 3 :
जब तीसरा लेवन बर लक्ष्मण जावय, शक्ति
बाण लग जावय ॥2।।
जब मेघनाथ के भुजा उखाड़े, अशोक
बन में हो—
मोर सिया घबराए अशोक बन में हां ॥2॥
अंतरा 4 :
जब चौथे लेवन बर रघुबर जावय, रावण मार
गिराए ॥2॥
जब सिया ला तैं संग में लावय, अशोक
बन में हो—
मोर सिया घबराए अशोक बन में हां ॥2॥
समापन :
मोर सिया घबराए अशोक बन में हां ॥2॥
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✍ लेखक: unknown
🎤 प्रस्तुतकर्ता: CG Jas Seva
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