मुखड़ा
अपने भुवन ले निकले कालिका करके सोलह श्रृंगार
नाचत कूदत चले भवानी संग संग जाये मतवार
अंतरा (1)
खप्पर खडग त्रिशुल कटारी रूप दिखे विकराल
लफ-लफ ओदे जीभ निकाले जिभिया हावे लाले लाल
अपने भुवन ले निकले कालिका करके सोलह श्रृंगार
नाचत कूदत चले भवानी संग संग जाये मतवार
अंतरा (2)
कारी-कारी दिखे महाकाली कारी चुंदी छरियाय
कारी हावय तोर हाथ के चुड़ी कारी काजर अंजाय
अपने भुवन ले निकले कालिका करके सोलह श्रृंगार
नाचत कूदत चले भवानी संग संग जाये मतवार
अंतरा (3)
नरमुंडन की माला पहिरे गर में ओहा ओरमाय,
टुटहा हाथ के करधन पहिरे देवता के मन ला भाय।
अपने भुवन ले निकले कालिका करके सोलह श्रृंगार
नाचत कूदत चले भवानी संग संग जाये मतवार
अंतरा (4)
कारी-कारी बिरबीट कारी रूप दिखे विकराल
असुरन मन के रक्त पिए अउ देवता के करे ऊबार।
अपने भुवन ले निकले कालिका करके सोलह श्रृंगार
नाचत कूदत चले भवानी संग संग जाये मतवार
अंतरा (5)
आंखी दिखे तोर लाली-लाली जीभ लमाये लाल
पापी मन ला कांट के ओकर लहू पिए लाले लाल
अपने भुवन ले निकले कालिका करके सोलह श्रृंगार
नाचत कूदत चले भवानी संग संग जाये मतवार
✍ लेखक: Smt. Nirmala nanke thakur
🎤 प्रस्तुतकर्ता: vipin janghel official
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