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🌺 जसगीत: एक्कईसो बहिनिया के भैया
मुखड़ा:
एक्कईसो बहिनिया के भैया ऐ लंगुरवा
हे गा,
अमुवा राखन बर चले जाये हो मां ॥2॥
ऐ भाई मोर अमुवा राखन बर चले जाये
हो मां ॥2॥
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अंतरा 1:
एक कोस रेंगय लंगुरे, अब दुई कोस
रेंगय गा,
नई तो दिखय कदली कछार हो मां ॥2॥
ये भाई मोर नई तो दिखय कदली कछार
हो मां ॥2॥
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अंतरा 2:
तीसर कोसन रेंगय लंगुरे बिचारा गा,
पहुंचथे कदली कछार हो मां ॥2॥
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अंतरा 3:
ये हाथ मा धरय भैया गोटी अउ गुलेलवा गा,
पहुंचथे कदली कछार हो मां ॥2॥
ये दुलरवा गा पहुंचथे कदली कछार हो मां ॥2॥
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अंतरा 4:
ये अमुवा मा बैठय दु ठन कोयली अउ
सुवना गा,
मारय गुलेल अउ गिराये हो मां ॥2॥
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अंतरा 5:
कोयली अउ सुवना ला ओली मा धरके गा,
मैया के दरश बर चले जाये हो मां ॥2॥
मोर दुलरवा मैया के दरश बर चले जाये
हो मां ॥2॥
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अंतरा 6:
एक कोस रेंगय लंगुरे, दुई कोस रेंगय गा,
नई तो दिखय देवी के दरबार हो मां ॥2॥
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अंतरा 7:
तीसर कोस रेंगय लंगुरे बिचारा गा,
पहुंचत हावय देवी दरबार हो मां ॥2॥
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अंतरा 8:
मंदिर के चारो कोती घुमत हे लंगुरवा गा,
नई तो दिखय धरम दुवार हो मां ॥2॥
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अंतरा 9:
ये महलों के तीर-तीर मा घुमत हे लंगुरवा गा,
नई तो दिखय धरम दुवार हो मां ॥2॥
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अंतरा 10:
ये का तो बिगाड़ेव जलनी, का तो लठायेव वो
जड़ दिये बजुरा किवाड़ हो मां ॥2॥
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अंतरा 11:
ये नई तो लठाये लंगुरे, नई तो बिगाड़े रे,
कोयली सुवना काबर लाये हो मां ॥2॥
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अंतरा 12:
ये कोयली अउ सुवना ला छोड़त हे
लंगुरवा गा,
खुलन लागे धरम दुवार हो मां ॥2॥
ये माया वो खुलन लागे धरम दुवार हो मां ॥2॥
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✍ लेखक: unknown
🎤 प्रस्तुतकर्ता: RAJENDRA PAL YADAV (RP MUSIC)
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