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🎵 जसगीत – “अबड़ सुघर लागे वो,
मैया तोर सेवा हर” 🎵
🔸 मुखड़ा (Chorus):
अबड़ सुघर लागे वो, मैया तोर सेवा हर।
अबड़ सुघर लागे वो, दाई तोर सेवा हर॥
ऐ दाई तोर सेवा हर मैया, दाई तोर सेवा हर,
अबड़ सुघर लागे वो, मैया तोर सेवा हर।
अबड़ सुघर लागे वो,दाई तोर सेवा हर।।
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🔹 अंतरा 1:
ये पहली सेवा मा मैया, सहदेव आये हे,
सहदेव आये हो मैया, सहदेव आये हे।
ये सुरहिन गैया के मैया, गोबर मंगाये हे॥
👉 (मुखड़ा दोहराव)
अबड़ सुघर लागे वो, मैया तोर सेवा हर।
अबड़ सुघर लागे वो,दाई तोर सेवा हर।।
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🔹 अंतरा 2:
ये दुसरे सेवा मा मैया, नकुल आये हे,
नकुल आये हो मैया, नकुल आये हे।
ये गोबर मंगाके सुघर अंगना लिपाये हे॥
👉 (मुखड़ा दोहराव)
अबड़ सुघर लागे वो, मैया तोर सेवा हर।
अबड़ सुघर लागे वो,दाई तोर सेवा हर।।
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🔹 अंतरा 3:
ये तीसरे सेवा मा मैया,अर्जुन आये हे,
अर्जुन आये हो मैया, अर्जुन आये हे।
ये अंगना लिपाके सुघर चौक पुराये हे॥
👉 (मुखड़ा दोहराव)
अबड़ सुघर लागे वो, मैया तोर सेवा हर।
अबड़ सुघर लागे वो,दाई तोर सेवा हर।।
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🔹 अंतरा 4:
ये चौथे सेवा मा मैया, भीमराज आये हे,
भीमराज आये हो मैया, भीमराज आये हे।
ये चौक पुराके सुघर जेवना बनाये हे॥
👉 (मुखड़ा दोहराव)
अबड़ सुघर लागे वो, मैया तोर सेवा हर।
अबड़ सुघर लागे वो दाई तोर सेवा हर।।
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🔹 अंतरा 5:
ये पांचवें सेवा मा मैया, धरमराज आये हे,
धरमराज आये हो मैया, धरमराज आये हे।
ये जेवना बनाके सुघर आरती उतारत हे॥
अबड़ सुघर लागे वो,मैया तोर सेवा हर।
अबड़ सुघर लागे वो,दाई तोर सेवा हर।।
✍ लेखक: Pekhanlal Sahu
🎤 प्रस्तुतकर्ता: unknown
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